“आप” है मासूम बच्चों के मौत के सौदागर।

“आप” है मासूम बच्चों के मौत के सौदागर।

अगर आप पिछले 3-4 महीनों से सोशल मीडिया, अख़बार, टीवी देख रहे है तो आपको ये भी पता होगा कि हमारे देश में कुछ ना कुछ आपदा घटित होते आ रहा है।
 चाहे वो बिहार का चमकी बुखार हो या चेन्नई का सुखाड़।
या फिर असम का बाढ़ हो या मुंबई में पानी का रौद्र रुप।
जून का माह याद कीजिए बिहार में करीब 200 लोगो की मौत गर्मी से हुई थी।
यही समय चमकी बुखार भी अपने चरम सीमा पर था और थोड़ा ढंग से देखिएगा तो कारण कहीं ना कहीं असहनीय गर्मी ही थी नाकी मुजफ्फरपुर की लीची।
आलम ऐसा था कि राजस्थान जैसे शहर में पारा 51°c तक चढ़ गया था।
वहीं चेन्नई में भी सूखा पड़ा है, लोग बारिश की दुआ मांग रहे है।
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यही समय पर मुंबई भी सूखे की मार झेल रहा था
परिवर्तन संसार का नियम है हमने भी पढ़ा है और आपने भी मगर प्रकृति ने सबसे ज्यादा पढ़ा है।
जैसे जैसे जुलाई शुरू हुआ समाचार मिलने लगा बिहार में झमाझम मूसलाधार बारिश हो रही है वो भी बिना रुके हुए।
और वो भी इस कदर की जिन घरों में आसपास भी आजतक पानी नहीं घुसा उनके भी बेडरूम  में चप्पल टाइटैनिक रूपी डूबती जहाज प्रतीत हो रही थी। 65 लोगो के मरने की खबर है, 50 लाख लोग प्रभावित हुए है।
यही हाल मुंबई का भी था, ऐसा की एयरपोर्ट के गेट पर सिक्योरिटी गार्ड नहीं बल्कि पानी निगरानी कर रहा था।
और हालात सबसे खराब असम का है फिलाल, आप इससे अंदाजा लगा सकते है कि 95% काजीरंगा पानी के अंदर है फिलहाल।
नाही हम मनुष्य सुरक्षित है और नाही जानवर।
अब सबसे बड़ा सवाल होता है कि आखिर गलती किसकी है?
तो कुछ लोग सरकार को जिम्मेदार मानते है, तो कुछ लोग डॉक्टरों को, तो कुछ लोग मीडिया को।
मगर ये सब जो भी हो रहा है उसके सबसे बड़े जिम्मेदार आप है( जी हां मैं आपकी ही बात कर रहा हूं)।
कोई भी कार्य करने में धीरज चाहिए चाहे वो अच्छा काम हो या बुरा।
अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रकृति का धीरज खत्म होने की ओर अग्रसर है।
एक हद तक ही आप सरकार के मत्थे कुछ भी मढ़ सकते है।
 याद रखियेगा प्रकृति के सब्र का बांध टूटा तो ना सरकार रहेगी और नाही आप खुद।
       ग्लोबल वार्मिग अपने चरम पर है।
चमकी बुखार टाइम पर सबने पेल के सरकार को, डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराया। जर्नलिस्ट लोगो को भी बहुत गाली पड़ी मगर असली कारण उन मासूम बच्चों के मरने का “आप” है।
जो लोग अभी बाढ़ में मर रहे है उन सभी का खून में आपका, हमारा ही हाथ है।
जिस तरीके से हम पृथ्वी की हरियाली को नष्ट कर रहे है, पानी बरबाद कर रहे है हमारी आने वाली पीढ़ी जम के कोसने वाली है हमलोगो को।
अब बात सिर्फ इतना है कि आप और हम कितना जल्दी इस बात को समझते है और सुधारते है।
प्रकृति से प्यार कीजिए, पेड़ पौधे लगाए, प्लास्टिक कम यूज कीजिए,पानी बचा के यूज कीजिए, बाकी आप जानते है क्या हानिकारक है प्रकृति के लिए और क्या नहीं।
मजाक में मत लीजिए, मौका है संभल जाइए वरना अगला टिकट आपका होगा, आपके चाहने वाले या हमारा भी हो सकता है और याद रखियेगा एक्ट ऑफ गॉड में जिनका विकेट डाउन होता है उसमे इंसुरेंस कंपनी भी पैसा नहीं देती है।
बाकी आप खुद बहुते समझदार है।
धन्यवाद 🙏

4 thoughts on ““आप” है मासूम बच्चों के मौत के सौदागर।”

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